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श्री बही तीर्थ

बही स्थित इस तीर्थस्थल की स्थापना राजा संप्रति ने की थी। यहां भगवान बही पार्श्‍वनाथ की काले रंग की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में विराजमान है। मूर्ति के पास स्थित बाघ की आकृति बेहद खूबसूरत प्रतित होती है। श्री वही पार्श्‍वनाथ श्वेतांबर जैन तीर्थ नामक ट्रस्ट इस मंदिर को संचालित करता है। मंदिर पिपलिया मंडी से 2 किमी. की दूरी पर है।

पशुपतिनाथ मंदिर

यह मंदिर मंदसौर जिले का प्रमुख आकर्षण है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर शिवना नदी के तट पर स्थित है। चारों दिशाओं में मंदिर के दरवाजे हैं, लेकिन प्रवेश द्वार केवल पश्चिम दिशा में ही खुलता है। मंदिर में 7.5 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है। इस द्वार में शिव के रौद्र रूप को दर्शाती एक प्रतिमा स्थापित है। भगवान शिव के दर्शन के लिए दूर-दूर से यहां भक्तों का आना-जाना लगा रहता है।

धर्म राजेश्वर

धर्म राजेश्वर पिपलिया मंडी से 122 कि.मी. पर गरोठ तहसील मे स्थित है।

कुकड़ेश्वर

जैन तीर्थस्थल के रूप में विख्यात यह पवित्र गांव पिपलिया मंडी से 46 किमी. की दूरी पर है। यहां के मंदिर राज्य के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में एक माने जाते हैं। श्री कुकादेशर तीर्थ यहां का 1050 साल पुराना जैन मंदिर है। मध्य प्रदेश का नीमच जिला इस स्थान से करीब 40 किमी. दूर है।

भानपुरा

यह स्थान पिपलिया से 111 किमी. दूर है। यहां शासन करने वाले राजा भामन के नाम पर इस स्थान का नाम भानपुरा पड़ा। यहां बना एक संग्रहालय मुख्य दर्शनीय स्थल है। संग्रहालय मे कला की अनेक दुर्लभ वस्तुओं को संग्रह देखा जा सकता है। उमा महेश्वर, कार्तिकेय, विष्णु और नंदी की आकर्षक तस्वीरों को भी यहां देखा जा सकता है।

गांधी सागर बांध

चंबल नदी पर बना यह बांध जिला मुख्यालय से 168 किमी. की दूरी पर स्थित है। 7 मार्च 1954 को प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस बांध की नींव डाली थी। इस बांध और यहां के पावर स्टेशन को बनवाने की कुल लागत 18 करोड़ 40 लाख थी। यह बांध 65 मीटर लंबा और 56 मीटर चौड़ा है। यहां के पावर स्टेशन में 23 मेगावाट के 5 टरबाइन हैं और इनकी कुल क्षमता 115 मेगावाट है।

पारासली

मंदसौर जिले का यह गांव पिपलिया मंडी से 90 किमी. दूर है। जैन तीर्थ केन्द्र के रूप में विख्यात इस गांव में राज्य के कुछ लोकप्रिय मंदिर देखे जा सकते हैं। श्री पारासली तीर्थ और श्री नागेश्वर तीर्थ यहां के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं। गांधी सागर बांध और गांधी सागर अभ्यारण्य यहां से पहुंचा जा सकता है।

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